शनिवार, 25 अप्रैल 2015

अब इंडिया नहीं, सिर्फ भारत, भारत और भारत !

सुप्रीम कोर्ट ने आज बहुत ही अहम फैसला लिया है कोर्ट ने कहा है कि इंडिया का नाम भारत होना चाहिए, इस मांग वाली याचिका पर उच्चतम न्यायाल ने केंद्र के साथ ही सभी प्रदेशों और केंद्र शासित प्रदेशों से इस संदर्भ में जवाब मांग लिया है। 
महाराष्ट्र के सामाजिक कार्यकर्ता निरंजन भटवाल ने इस याचिका में कहा है कि संविधान में इंडिया शब्द का प्रयोग केवल संदर्भ के रूप में ही हुआ है। भारत का ही प्रयोग आधिकारिक रूप में होना चाहिए।
उन्होंने सभी गैर सरकारी संगठनों और कॉरपोरेट्स को निर्देशित करने को कहा है कि वे सभी आधिकारिक और गैर आधिकारिक कामों के लिए भारत का ही प्रयोग करें।
चीफ जस्टिस एचएल दत्तू एवं न्यायाधीश अरूण मिश्रा की पीठ इस मामले की सुनवाई चल रही है।
याचिका में यह भी बोला गया है कि प्रदेशों को चाहिए कि वे सरकारी कागजातों और केंद्र के आदेशों-निर्देशों में इंडिया शब्द के उपयोग को प्रतिबंध लगाने और भारत ही सम्बोधित करने के लिए कहें।
याचिका में यह भी बताया गया है कि संविधान सभा में देश का नाम फिक्स करने को लेकर भारत, हिंदुस्तान, हिंद और भारतभूमि या भारतवर्ष जैसे नामों पर ही विचार विमर्श हुआ था।

संविधान की धारा एक में इंडिया शब्द केवल संदर्भ के रूप में है, हालांकि धारा 395 में स्पष्ट तौर से भारत शब्द का उल्लेख हुआ है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें